पीढ़ियां बदलीं, कलाकार बदले लेकिन नहीं बदली रामलीला की परंपरा, भैंसदेही में 79 वर्षों से लगातार हो रहा रामलीला का मंचन

भैंसदेही। शंकर राय। भैंसदेही की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वर्षों से जीवंत रखने वाली नवयुवक दुर्गा रामलीला मंडल की रामलीला इस वर्ष अपने गौरवशाली 80वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। स्थानीय कलाकारों द्वारा निरंतर 79 वर्षों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है, जो नगर की समृद्ध धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है।

नवरात्रि पर्व को लेकर रामलीला मंडल द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 11 अक्टूबर से नवरात्रि प्रारंभ होने के साथ ही रामलीला मंचन की तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में समिति जुट गई है। नगर के राम मंदिर में प्रतिदिन रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकारों को तालीम दी जा रही है, ताकि मंचन के दौरान कलाकार अपने अभिनय और संवादों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

रामलीला मंडल के अध्यक्ष संजय तिवारी ने बताया कि इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यहां के स्थानीय कलाकार हैं। करीब 5 वर्ष की उम्र के बच्चों से लेकर 90 वर्ष तक के लोग रामलीला के अलग-अलग पात्रों का अभिनय करते हैं। यही सहभागिता इस परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


80वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही भैंसदेही की यह रामलीला निश्चित रूप से नगरवासियों के लिए गौरव का विषय है। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही है और आने वाली पीढ़ियों को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दे रही है।
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