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80 वर्षों की रामलीला परंपरा के अनमोल साधक सुरेश चौहान, 40 साल से शूर्पणखा और मां कौशल्या का किरदार निभाकर पेश कर रहे समर्पण की मिसाल

PPurna Express DeskNewsroom · Betul, M.P
16 Oct 2026 · 06:27 pm 4 min 00 reading now
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80 वर्षों की रामलीला परंपरा के अनमोल साधक सुरेश चौहान, 40 साल से शूर्पणखा और मां कौशल्या का किरदार निभाकर पेश कर रहे समर्पण की मिसाल
भैंसदेही में चार दशकों से रामलीला के प्रति अटूट श्रद्धा, मेहनत और अभिनय के दम पर सुरेश चौहान ने बनाई अलग पहचान, युवा पीढ़ी के लिए बने प्रेरणास्रोत

(भैंसदेही/शंकर राय) मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के भैंसदेही नगर में लगभग 80 वर्षों से रामलीला का भव्य मंचन किया जा रहा है। यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और परंपरा का प्रतीक भी है। इस ऐतिहासिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने में स्थानीय कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन्हीं समर्पित कलाकारों में एक नाम सुरेश चौहान का है, जो पिछले 40 वर्षों से रामलीला के मंच पर अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाए हुए हैं।

सुरेश चौहान का रामलीला के प्रति समर्पण और उनकी मेहनत इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में सच्ची श्रद्धा, लगन और कला के प्रति सम्मान हो, तो वर्षों तक किसी परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। वे रामलीला में शूर्पणखा के साथ मां कौशल्या का भी महत्वपूर्ण किरदार निभाते रहे हैं। अलग-अलग स्वभाव और भावनाओं वाले इन पात्रों को मंच पर जीवंत करना उनके अभिनय कौशल, अनुभव और निरंतर अभ्यास को दर्शाता है।

चार दशक का सफर, अभिनय में अनुभव और रामलीला के प्रति अटूट आस्था

सुरेश चौहान के लिए रामलीला महज एक मंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि आस्था, साधना और सांस्कृतिक सेवा का माध्यम है। चार दशकों से लगातार रामलीला से जुड़े रहना उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण की मिसाल है। वर्षों के इस सफर में उन्होंने अपने अभिनय से न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में भी योगदान दिया है। विशेष रूप से शूर्पणखा के किरदार में उनकी निरंतर सक्रियता यह दर्शाती है कि वे आज भी उसी उत्साह और लगन के साथ मंच पर उतरते हैं। उम्र और समय के साथ अनुभव बढ़ता गया, लेकिन रामलीला के प्रति उनका जुनून और श्रद्धा कम नहीं हुई। यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं सुरेश चौहान आज के दौर में जहां युवा पीढ़ी का रुझान आधुनिक मनोरंजन की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं सुरेश चौहान जैसे कलाकार यह संदेश दे रहे हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़कर भी समाज में विशिष्ट पहचान बनाई जा सकती है। उनका चार दशक का सफर नई पीढ़ी को अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।

भैंसदेही की रामलीला की पहचान को मजबूत बनाने में सुरेश चौहान जैसे स्थानीय कलाकारों का योगदान सराहनीय है। ऐसे कलाकारों का सम्मान और प्रोत्साहन आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं के समर्पण से वर्षों पुरानी परंपराएं आज भी जीवंत हैं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रही हैं।

सुरेश चौहान का 40 वर्षों का यह अभिनय सफर बताता है कि सच्ची लगन और समर्पण से किया गया कार्य केवल एक भूमिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन जाता है।

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